UCO Bank

सरकारी पेंशनरों हेतु केंद्रीकृत शिकायत निवारण तंत्र संबंधी नीति

प्रस्तावना

प्रतिस्पर्धी बैंकिंग के वर्तमान परिदृश्य में, कारोबार के विकास में निरंतरता के लिए ग्राहक सेवा में उत्कृष्टता सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है। किसी भी कॉर्पोरेट इकाई हेतु ग्राहक-शिकायत कारोबारी जीवन का हिस्सा है।

प्रतिस्पर्धी बैंकिंग में पेंशन का भुगतान एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्षेत्र है। एक पेंशनभोगी वह व्यक्ति होता है जो अपने नियोजन का कार्यकाल पूरा करने के बाद एक परिवर्तित गतिविधि से गुजरता है जिसे आम तौर पर सेवानिवृत्ति के रूप में जाना जाता है। पेंशनरों में वरिष्ठ नागरिकों की बहुलता है जिनकी अपेक्षाओं को पूरा करने का दायित्व बैंक पर है।

पेंशनरों की शिकायतों के समाधान की आवश्यकता महसूस की गई ताकि शिकातकर्ता की संतुष्टि हेतु समयबध्द निवारण प्रभावी हो सके।

सरकारी पेंशनरों हेतु शिकायत निवारण तंत्र की नीतिगत दिशानिर्देश निम्नलिखित बुनियादी सिद्धांतों पर आधारित हैं:

  • पेंशनरों से सदैव उचित व्यवहार किया जाए।
  • पेंशनरों द्वारा उठाए गए शिकायतों को न्यूनतम समय में शिष्टाचारपूवर्क निपटाया जाए।
  • पेंशनरों को संगठन के भीतर उनकी शिकायतों/परिवेदनाओं को पंजीकृत कराने हेतु उपलब्ध संसाधनों के बारे में पूर्ण रूप से बताना चाहिए और यदि वे बैंक की प्रतिक्रिया से पूरी तरह संतुष्ट है तो उन्हें वैकल्पिक उपाय अपनाने का अधिकार है।
  • बैंक, सभी शिकायतों को बड़ी कुशलता एवं उचित रूप से निवारण करेगा।
  • बैंक कर्मचारियों को विश्वसनीय होकर और बिना किसी पूर्वाग्रह के पेंशनभोगी के हित में कार्य करना चाहिए।
  • पेंशनरों की शिकायतों को कम करने हेतु स्टाफ सदस्यों में जागरूकता होनी चाहिए।

अतः इस नीति का आशय है:

  • यथाशीघ्र गलतियों को सुधाराना तथा इस तरह की गलतियों की पुनरावृत्ति न होने को सुनिश्चित करना।
  • शिकायतों का तत्काल समाधान।
  • बैंक की प्राथमिक जवाब से संतुष्ट नहीं होने की स्थिति में शिकायत को आगे बढ़ाने के लिए पेंशनरों को अनुमति देना।
  • तकनीकी विफलता से उत्पन्न होने वाली समस्याओं को कम करने के लिए उचित वैकल्पिक साधन प्रदान करना।

निवारण तंत्र

  • शिकायतें - यह नीति पेंशनरों को उनके शिकायतों की प्राप्ति एवं पावती एक संरचित तरीके से निम्न रूप में प्रदान करती है:
    • केन्द्रीकृत पेंशन भुगतान केन्द्र (सीपीपीसी) को सीधे टोल फ्री नंबर से शिकायत दर्ज कराई जा सकती है और तुरंत कॉल आईडी प्रदान की जाएगी।
    • टोल फ्री के अलावा पेंशनरों के लिए विशेष रूप से तैयार बैंक की समर्पित ई-मेल/वेबसाइट अथवा डाक के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
    • वेबसाइट पर शिकायत दर्ज होने पर एक विशेष रसीद तुरंत पेंशनर को उपलब्ध कराई जाएगी।
    • टेलीफोन के माध्यम से भी पेंशनर सीपीपीसी को शिकायत दर्ज करा सकते हैं और तुरंत कॉल आईडी प्रदान की जाएगी।
  • शिकायत संरचना में निम्नलिखित जानकारी सम्मिलित की जाए:
    • पेंशनर/परिवार पेंशनर का नाम
    • पेंशन को स्वीकृत करने वाला प्राधिकार
    • पीपीओ नंबर
    • पेंशनर की जन्मतीथि/ मृत्यु की तारीख (परिवार पेंशनर के मामले में)
    • पेंशन का वर्गीकरण जैसे सेवानिवृत्ति/परिवार/अमान्य/स्वैच्छिक
    • पेंशन देने वाली शाखा का नाम
    • बचत खाता संख्या (एकल/संयुक्त)
    • पेंशनर का वर्तमान पता
    • दूरभाष/मोबाइल नंबर एवं ई-मेल आईडी, यदि हो।
    • शिकायत का विवरण
  • पेंशनरों की शिकायतों/परिवेदनाओं के निवारण के लिए इंटरनेट तंत्र

    इस नीति के अंतर्गत कोई भी पेंशनर अपनी शिकायत लिखित रूप में सीपीपीसी/शाखा/अंचल कार्यालय अथवा प्रधान कार्यालय में दर्ज़ करा सकता है। बैंक के साथ-साथ सीपीपीसी के टोल फ्री नंबर, सीपीपीसी के दूरभाष, पेंशनर केयर ई-मेल आईडी अथवा अन्य किसी सुविधाजनक माध्यम से भी शिकायत दर्ज़ कराई जा सकती है। जब कोई शिकायत दूरभाष या वेबसाइट के माध्यम से प्राप्त होती है, पेंशनर को तत्काल एक काल आईडी प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त शिकायत प्राप्ति की तारीख से तीन दिनों के भीतर एक पावती भेजी जाएगी।

    केन्द्र सरकार/राज्य सरकार, मंत्रालयों, विभागों, भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, संसद एवं विधान परिषद के सदस्यों से प्राप्त शिकायतों को इस आशय से अलग रखा जाएगा कि प्राप्ति तारीख के 30 दिनों के समयावधि के भीतर इनका समाधान करना है। बैंक, हालांकि अनाम एवं अहस्ताक्षरित शिकायतों का संज्ञान नहीं लेगा।

  • समय-सीमा -

    शिकायत प्राप्ति की तारीख से 15 दिनों की समयावधि के भीतर शिकायतों के समाधान के व्यवस्था सीपीपीसी करेगा। यदि सीपीपीसी समाधान करने में असफल रहता है तो अगले उच्च प्राधिकारी जैसे परिचालन एवं सेवाएं विभाग, प्रधान कार्यालय को अग्रेषित करेगा। प्रधान कार्यालय अगले 15 दिनों के भीतर मामले के समाधान का प्रयास करेगा। शिकायत के समाधान हेतु किसी भी स्तर पर अथवा सभी स्तरों को मिलाकर निर्धारित समय-सीमा शिकायत प्राप्ति की तारीख से 30 दिनों का होना चाहिए। निर्धारित समय-सीमा के भीतर शिकायतों के समाधान के लिए सीसीपीसी सभी आवश्यक कदम उठाएगा। नियंत्रण से परे होने के कारण यदि समाधान करने में असमर्थता है तो सीपीपीसी शिकायतकर्ता को सूचित करते हुए इसे सीपीएओ को भेज देगा।

    उपर्युक्त समय-सीमा के भीतर शिकायत का समाधान नहीं हो पाने के मामले में, उचित कारण सहित पेंशनर को यह बताया जाए कि क्यों इसके समाधान में अधिक समय की आवश्यकता है। यदि पेंशनर इस प्रतिक्रिया से संतुष्ट नहीं है तो वह इसके समाधान के लिए बैंकिंग लोकपाल योजना 2006 अथवा इंटरनेट लोकपाल, यदि कोई हो, के अंतर्गत बैंकिंग लोकपाल से संपर्क कर सकता है। बैंक की वेबसाइट पर बैंकिंग लोकपाल योजना 2006 की प्रति दर्शाई जाए।

  • सीपीपीसी/शाखा स्तरीय पेंशनर्स समिति

    पेंशनर्स और बैंक की शाखाओं के मध्य संवाद को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शाखाओं को इस प्रकार की समितियों को गठित करने हेतु आवश्यक कदम उठाने चाहिए। शाखा स्तरीय ग्राहक सेवा समिति की बैठक आयोजित करते समय शाखाएं पेंशनर्स सहित वरिष्ठ नागरिक पेंशनर्स को भी बुलाना चाहिए। इस प्रकार की समितियों की बैठक माह में कम से कम एकबार अवश्य आयोजित किए जाए जिसमें खुला संवाद हो, सुझावों को प्राप्त किया जाए, मामलों में हो रही देरी पर चर्चा की जाए एवं शिकायतों के साथ पेंशनर्स द्वारा सामना किए गए दिक्कतों पर चर्चा की जाए। वरिष्ठ नागरिकों के सहज स्तर को ध्यान में रखते हुए पेंशनर्स को मिलने वाली सेवाओं की स्तर में विकास में वृद्धि के अर्थोपाय पर चर्चा की जाए।

    स्थानीय पेंशनर्स, वरिष्ठ नागरिकों, रक्षा विभाग सहित पेंशन मामलों के जानकार उच्च सरकारी अधिकारियों और स्थानीय अंचल कार्यालय के उच्च अधिकारियों की सीपीपीसी एक पेंशनर्स समिति गठित करें। सीपीपीसी प्रत्येक माह एक बैठक आयोजित करें तथा परिचालन एवं सेवाएं विभाग, प्रधान कार्यालय को अपने बहुमूल्य सुझाव प्रेषित करें।

  • शिकायतों/परिवेदनाओं के निवारण के लिए नोडल अधिकारी एवं अन्य नामित अधिकारी

    सम्पूर्ण बैंक के लिए पेंशनर्स शिकायत निवारण तंत्र की नीतियों के क्रियान्वयन हेतु नोडल अधिकारी के रूप में महाप्रबंधक अथवा समकक्ष रैंक के अधिकारी की नियुक्ति का प्रावधान है। इसके पश्चात नीति कस्टमर केयर हेतु नोडल अधिकारी तथा पेंशनर्स शिकायत निवारण तंत्र हेतु नोडल अधिकारी नामित करती है। अंचल कार्यालय, नागपुर ने पहले ही ग्राहक संपर्क अधिकारी नियुक्त कर चुका है जो सीपीपीसी के संबंध में पेंशनर्स की शिकायतों/परिवेदनाओं को भी देखता है। पेंशनर्स के स्थानीय क्षेत्र से इतर अन्य क्षेत्र से जुड़े होने की स्थिति में अंचल कार्यालय, नागपुर के ग्राहक संपर्क अधिकारी दिए गए समय-सीमा के भीतर शिकायत के निवारण हेतु संबन्धित अंचल कार्यालय से तत्काल संपर्क करते हैं। सीपीपीसी, नागपुर में विशेष रूप से पेंशनर्स सेल का गठन किया गया है जो पेंशनर्स की शिकायतों/परिवेदनाओं सहित सभी पेंशन मामलों को देखता है।

  • अनिवार्य प्रदर्शन की आवश्यकता

    निम्नलिखित पहलुओं पर जानकारी प्रदर्शन की व्यवस्था का नीति में प्रस्ताव है:

    1. विशेष रूप से पेंशनरों के लिए बैंक की वेबसाइट के माध्यम से शिकायतों/ सुझावों की प्राप्ति की उचित व्यवस्था
    2. बैंक की वेबसाइट पर नोडल अधिकारी के नाम, पता और संपर्क नंबर पहले से ही प्रदर्शित किया गया है
    3. क्षेत्र के बैंकिंग लोकपाल का संपर्क विवरण
  • इस नीति के अंतर्गत पेंशनरों को प्राप्त अधिकार
    1. तीन दिनों के भीतर विशिष्ट संदर्भ नंबर/ कॉल आईडी के साथ पावती प्राप्त करना
    2. पेंशनर की शिकायत प्राप्त होने की तारीख से चार सप्ताह की अवधि के भीतर इसे निपटाया जाएगा। शिकायत के निवारण में अधिक समय लगने की स्थिति में, बैंक को उचित कारणों के साथ निवारण में लगने वाले अधिक समय के बारे में पेंशनर को सूचित करना होगा।
  • समाधान तंत्र

    पेंशन मामलों के संबंध में शिकायतों/ परिवेदनाओं के समाधान के लिए सीपीपीसी/शाखा प्रबंधक जिम्मेदार हैं। शाखा में प्राप्त शिकायतों को बंद करने की सुनिश्चितता के लिए भी जिम्मेदार होंगे। यह पेंशनरों की संतुष्टि के लिए शिकायतों को पूरी तरह से निवारण करना इनका सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य होगा। यदि पेंशनर संतुष्ट नहीं है, तो उसे अन्य उपचारात्मक उपायों, वैकल्पिक रास्ते इत्यादि बताना होगा। यदि सीपीपीसी/ शाखा प्रबंधक का मानना है कि उनके स्तर पर शिकायत का समाधान करना संभव नहीं है, तो वह इसे संबंधित अंचल कार्यालय के ग्राहक संपर्क अधिकारी को दिशानिर्देश हेतु तत्काल भेजेगा। यदि सीपीपीसी/ अंचल कार्यालय भी यह पाते हैं कि वे भी इस शिकायत के निवारण में सक्षम नहीं हैं, तो बिना किसी देरी के अगले उच्च अधिकारी अर्थात प्रधान कार्यालय के नोडल अधिकारी को इस तरह की शिकायतों को बढ़ाना होगा।

  • शिकायतों के निवारण हेतु परिचालन स्टाफ को संवेदनशील बनाना

    शिकायतों से निपटने के लिए स्टाफ सदस्यों को समुचित प्रशिक्षित होना चाहिए। बैंक, जनता के साथ व्यवहार करता है और इसलिए मतभेद और घर्षण के क्षेत्र उत्पन्न हो सकते हैं। खुले दिमाग और मुस्कान वाली चेहरे से बैंक कर्मचारी, ग्राहकों का विश्वास जीतने में सक्षम हो सकते हैं। नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि वह यह सुनिश्चित करें कि शिकायतों से निपटने के लिए स्थापित आंतरिक मशीनरी सभी स्तरों पर सहजता एवं कुशलता से कार्य कर रही है। बैंक के मानव संसाधन विभाग को विभिन्न स्तरों पर कर्मचारियों के प्रशिक्षण की आवश्यकता पर उन्हें अपनी प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

  • बैंक के सभी स्तर पर प्रत्येक माह ग्राहक दिवस का प्रतिपालन

    माह में कम से कम एकबार, सीपीपीसी स्तर पर शाखा प्रबंधक, अंचल प्रबंधक और प्रधान कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर पेंशनरों से बातचीत हेतु किसी विशेष तारीख और समयावधि को अलग रखा जाए। इससे पेंशनरों को उनकी समस्याओं के निपटान में मदद मिलेगी। अनेक छोटी समस्याओं के साथ–साथ बैंक के खिलाफ असंतोष को कम करने के लिए यह पर्याप्त होगा।

  • शिकायत बाक्स/पंजिका का रखरखाव

    बैंक के सभी कार्यालय एवं शाखाएं एक शिकायत बॉक्स/पंजिका बनाए रखेगी जहां पेंशनर/ ग्राहक अपनी शिकायतों को डाल/लिख सकते हैं। शिकायत बॉक्स एक उचित स्थान पर रखा जाए जहां से यह आसानी से दिखाई दे तथा पहचानी जा सके।

  • नीति में सुधार हेतु संशोधन

    अपने विवेकाधिकार पर बैंक को जब भी उचित एवं सही लगे, इस नीति में संशोधन/ सुधार करने का अधिकार बैंक सुरक्षित रखता है।

top

यूको में नया-नया :
यूको बैंक ने ऐसे व्यक्तियों को ऋण सुविधा प्रदान करने के लिए यूको कौशल ऋण योजना शुरू की है, जो कौशल विकास पाठ्यक्रमों को शुरू करना चाहते हैं। | अखंडता वचन - सीवीसी पहल | प्रतिभूति बाजार में कारोबार करते समय केवाईसी एक बार की जानी वाली प्रक्रिया है - सेबी द्वारा पंजीकृत मध्यस्थ (दलाल, डीपी, म्युचुअल फंड आदि) द्वारा एक बार केवाईसी की प्रक्रिया पूरी होने के पश्चात, जब आप अन्य मध्यस्थ से संपर्क करते है तो आपको पुनः इस प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। | बंद करें - अपने डीमैट खाते से अनधिकृत लेदेन पर रोक लगाने के लिए - अपने निक्षेपागार (डिपोजिटरी)सहभागी के साथ अपनी मोबाइल नम्बर को अद्यतन करें । डीमैट खाते से होनेवाले सभी नामे एवं अन्य महत्वपूर्ण लेन देन की अलर्ट अपने पंजीकृत मोबाइल पर उसी दिन सीधे एनएसडीएल से प्राप्त करें । (निवेशकर्ता के हित में जारी ) | बंद करें - आईपीओ को सब्स्क्राईब करते समय निवेशकर्ता को चेक जारी करने की आवश्यकता नहीं है । आवंटन की स्थिति में भुगतान करने के लिए अपने बैंक को अधिकृत करने हेतु केवल आवेदन फार्म में खाता संख्या लिख कर हस्ताक्षर करें । चूंकी रकम निवेशक के खाते में ही रहती है अतः रकम वापसी के चिंता की कोई बात नहीं है। |
© 2016 सर्वाधिकार सुरक्षित