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प्रबंधन / दबाव ग्रस्त एम.एस.एम.ई आस्तियों के पुनर्गठन हेतु नीति

वर्तमान आर्थिक मंदी के दौर में एम.एस.एम.ई के क्षेत्र में दवाब बढ़ता जा रहा है। बहुत से आंतरिक एवं बाह्य तत्वों ने एम.एस.एम.ई की क्षमता पर दवाब डाला है जिनके कारण आस्तियां दवाबग्रस्त होती जा रही हैं।

कुछ इकाइयों द्वारा ऋण अदायगी में चूक के कारण अस्थायी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें पुन: पट्टी पर लाने हेतु अल्पकालिक छूट /राहत देने की आवश्यकता है।

ऋण अदायगी संबंधी चूक को तीन वर्गों में विभाजित किया गया है। चूक के दिनों के आधार पर वसूली की कार्रवाई की जाती है।

अदायगी में तीस दिनों से कम की चूक

इस प्रकार की चूक अस्थायी, नकदी की कमी तथा नकदी प्रवाह के समायोजन के कारण हो सकती है। शाखा, कार्यालयों को बकाया राशि की शीघ्र प्राप्ति हेतु कड़ी निगरानी एवं प्रोमोटरों से साथ अनुवर्ती कार्रवाई करनी चाहिए जिससे अदायगी में चूक होने के कारणों का पता लगाया जा सके एवं 30 दिवस में वसूली की संभावना बनाई जा सके जिससे ऋण खाते दवाबग्रस्त आस्तियों की श्रेणी में जाने से बच सकें।

अदायगी में 30 से 60 दिनों तक की चूक

ऐसी आस्तियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि यदि चूक निरंतर 90 दिनों के बाद भी जारी रहती है तो इन में से कुछ खाते अंतत: अनर्जक आस्तियों की श्रेणी में भी जा सकते हैं। ऐसे खातों की सूची अंचल कार्यालय को प्रेषित की जाए जिससे अंचल कार्यालय द्वारा गहन समीक्षा एवं निगरानी की जा सके। ऐसे खाते निम्नलिखित श्रेणियों में वर्गीकृत किए जाएं – i) जो अस्थायी प्रकार की समस्या का सामना एवं (i) जो मध्यावधि प्रकार की समस्या का सामना कर रहे हैं । वर्गीकरण के आधार पर ही ईकाई द्वारा प्रस्तुत किए जानेवाले संशोधित नकद प्रवाह विवरण की जांच के बाद आवश्यकतानुसार पुनर्गठन पर विचार कर उसका क्रियान्वयन किया जा सकता है।

  1. अस्थायी नकदी की समस्या का सामना करने वाले खाते
  2. अस्थाई नकदी का सामना करनेवाली इकाइयों के लिए संशोधित नकदी प्रवाह के आधार पर अंतिम तिथि को बढ़ाए बिना तात्कालिक अगली किस्तों को घटाकर / आस्थागित कर मूल चुकौती अवधि के भीतर मूल किस्तों के आस्थगन/ पुनर्निर्धारण पर विचार किया जा सकता है।

  3. मध्यावधि नकदी समस्या का सामना करने वाले खाते
  4. मध्यावधि प्रकार की नकदी समस्या का सामना करने वाली ईकाइयों के लिए निम्न राहतों तथा छूट पर विचार किया जा सकता है।

पुनर्निर्धारण

यदि यह पाया जाता है कि संशोधित नकदी प्रवाह अंतिम तिथि बढ़ाने की ओर इंगित करता है जबकि अंतिम तिथि की अवधि में पुनर्निर्धारण मध्यावधि नकदी समस्या का सामना करने में सक्षम ना हो तब आवश्यकतानुसार भविष्य की किश्तों को घटाकर/स्थगित करके अंतिम तिथि को बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।

दोनों ही परिदृष्यों में डीएससीआर के वर्तमान मानकों के आधार पर चुकौती कार्यक्रम को अंतिम रूप दिया जाएगा।

जो इकाइयां मध्यावधि प्रकार की नकदी समस्या का सामना कर रही हैं, उनकी स्थिति के आधार पर पुनर्निर्धारण के अतिरिक्त ब्याज की राशि एवं नवीन सहायता आदि के बारे में विचार किया जा सकता है।

  1. ब्याज राशि का निधीयन
  2. सामान्यत: अतिदेय ब्याज (जिसमें जहां कहीं प्रयोज्य हो, भावी चक्रवर्धित ब्याज तथा दांडिक ब्याज (पीआई) शमिल है) तथा भविष्य (12 माह से अनधिक) में देय होने वाले ब्याज का निधीयन किया जा सकगा । इस प्रकार से निधीयन किया गया ब्याज आरंभिक मोरोटोरियम के बाद जिसकी अवधि ऐसे निधीयन से 6 माह से ज्यादा की नहीं होगी, से अधिकतम 36 महीनों के भीतर देय होगा । निधीयन की गई राशि पर डाक्युमेंट दर अथवा साहाय्य/छूट प्रस्ताव के अनुमोदन के बाद निर्धारित दर, इन दोनों में से जो कम होगा उस दर से ब्याज प्रभारित होगा।

  3. नवीन सहायता
    कार्यशील पूंजी(डब्ल्यूसी)/कार्यशील पूंजी सावधि ऋण (डब्ल्यूसी.टी.एल)
  4. उन यूनिटों जिसकी परिचालनगत कठिनाइयां प्राथमिक रूप से चलनिधि की कमी /कार्यशील पूंजी सुविधा की अपर्याप्त संस्वीकृति के कारण उत्पन्न हुई है, के संदर्भ में ताजा अथवा/या अतिरिक्त डब्ल्यूसी/डब्ल्यूसीएलटी के माध्यम से चलनिधि (लिक्विडिटी) की सहायता पर चयनात्मक आधार पर विचार किया जा सकता है।

  5. सावधि ऋण
  6. जहां यह देखा जाता हो कि इस प्रकार की सहायता उपलब्ध कराने से इसके परिचालनगत टर्नराउंड लाने में सहायता मिलेगी वहां बैलेंसिंग एक्विप्मेंट अर्जित करने तथा/या आवश्यकता आधारित विस्तार के लिए ताजा सावधि ऋण देने के लिए चयनात्मक आधार पर विचार किया जा सकता । जहां, जैसाकि बी (i) में जैसा कहा गया है, चूक होने के 75 दिनों के भीतर कार्यांवित किया जानेवाला पुनर्निर्धारण हर स्थिति में खाते के एनपीए में खिसक जाने से पूर्व ही अर्थात 90 दिनों के भीतर कार्यान्वित कर दिया जाना चाहिए।

अदायगी में 60 दिनों से अधिक की चूक

रूपए 2 करोड़ से अधिक बकाया वाले खाते जिनमें 60 दिनों से अधिक की चूक है, उनको अगले उच्चतर प्राधिकारी को 60 वें दिन तक गहन समीक्षा तथा निगरानी हेतु भेज दिया जाना चाहिए।

इसके अलावे, उन मामलों में जहां इकाई की समस्या दीर्धावधिक/संरचनापरक है और जहां यह देखा गया है कि उक्त प्रयासों से खाता(तों) को पटरी पर लाने की संभावना नहीं है वहां संभाव्य इकाईयों को समग्र पुनर्वास पैकेज देने के ज़रूरत है । रु. 2 करोड़ बकाया वाले मामलों में पुनर्वास पैकेज पर अंचल कार्यालय स्तर पर तथा रु. 2 करोड़ से अधिक के बकाया वाले मामलों के पुनर्वास पैकेज पर सर्किल कार्यालय स्तर पर विचार किया जाएगा।

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